बैठा नदी के तीर पर कर रहा इंतजार ,
ना हवा का रुख इधर ना पानी की धार.............
पंछी दे रहे संकेत, आ रहा तेरा प्यार ,
मिट रही हैं दूरियां बढ़ रहा इंतजार ,
धडकनें हुई तेज़ मन में उठा ज्वार ,
लगा मौसम हुआ सुहाना छाने लगी बहार ,
फिर ...................
फिर समझ आया मुझे कैसे करेगी नदिया पार ,
आयेगी कैसे इधर जब उधर ही उसका संसार ,
ना इधर कोई चमन हैं न इधर कोई बहार ,
क्यूँ आयेगी इधर जब उधर मिला उसे प्रेम अपार ,
फिर भी ये दिल न मान रहा करता हैं उससे प्यार ,
बैठा नदी के तीर पर कर रहा इंतजार ,
ना हवा का रुख इधर ना पानी की धार .............
ना हवा का रुख इधर ना पानी की धार.............
पंछी दे रहे संकेत, आ रहा तेरा प्यार ,
मिट रही हैं दूरियां बढ़ रहा इंतजार ,
धडकनें हुई तेज़ मन में उठा ज्वार ,
लगा मौसम हुआ सुहाना छाने लगी बहार ,
फिर ...................
फिर समझ आया मुझे कैसे करेगी नदिया पार ,
आयेगी कैसे इधर जब उधर ही उसका संसार ,
ना इधर कोई चमन हैं न इधर कोई बहार ,
क्यूँ आयेगी इधर जब उधर मिला उसे प्रेम अपार ,
फिर भी ये दिल न मान रहा करता हैं उससे प्यार ,
बैठा नदी के तीर पर कर रहा इंतजार ,
ना हवा का रुख इधर ना पानी की धार .............