Monday, December 19, 2011

इंतजार

बैठा नदी  के  तीर  पर  कर  रहा  इंतजार ,
ना  हवा  का  रुख  इधर  ना पानी  की  धार.............

पंछी  दे  रहे  संकेत, आ  रहा  तेरा  प्यार ,
मिट  रही  हैं   दूरियां  बढ़  रहा   इंतजार ,
धडकनें  हुई  तेज़  मन  में  उठा  ज्वार ,
लगा  मौसम  हुआ  सुहाना  छाने  लगी  बहार ,

फिर ...................

फिर  समझ   आया  मुझे  कैसे  करेगी  नदिया  पार ,
आयेगी  कैसे  इधर  जब  उधर  ही  उसका  संसार ,
ना  इधर  कोई  चमन  हैं  न  इधर  कोई   बहार ,
क्यूँ  आयेगी इधर   जब  उधर  मिला  उसे  प्रेम  अपार ,
फिर   भी  ये  दिल  न  मान  रहा  करता  हैं  उससे  प्यार ,
 
बैठा   नदी  के  तीर  पर  कर  रहा  इंतजार ,
ना  हवा  का  रुख  इधर  ना  पानी  की  धार .............

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